इंदौर/खंडवा. मप्र लोकसेवा आयोग द्वारा 12 जनवरी रविवार काे आयाेजित परीक्षा में आदिवासी समाज की भील जनजाति को लेकर आपत्तिजनक सवाल पूछे जाने पर पीएससी के परीक्षार्थी एवं आदिवासी विधानसभा क्षेत्र पंधाना से भाजपा विधायक राम दांगोरे ने आपत्ति जताई है। उन्हाेंने कहा कि सरकार द्वारा पीएसपी के पेपर सेट करने वाले अधिकारी को निलंबित कर एट्रोसिटी एक्ट के तहत कार्रवाई नहीं की जाती है तो आंदोलन किया जाएगा।
भील जनजाति की आपराधिक प्रवृत्ति का कारण?
भाजपा विधायक का आरोप है कि एमपी पीएससी परीक्षा की दूसरी पाली के प्रश्नपत्र में आदिवासी समाज की भील जनजाति को लेकर गलत व अमर्यादित टिप्पणी की गई। परीक्षा में गद्यांश से जुड़ा आपत्तिजनक सवाल पूछा गया। सवाल में लिखा था कि भील जनजाति की आपराधिक प्रवृत्ति का कारण यह है कि वे सामान्य आय से देनदारियां पूरी नहीं कर पाते। धन उपार्जन की आशा में अनैतिक कामों में भी संलिप्त हो जाते हैं। इस मामले में एमपी पीएससी सचिव रेणु पंत ने कहा कि वह विशेषज्ञों से चर्चा के बाद ही कुछ कह पाएंगी।
अशोभनीय टिप्पणी से आहत : लक्ष्मण सिंह
मामले में मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भाई और कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह ने ट्वीट कर लिखा है कि भील समाज पर प्रदेश शासन के प्रकाशन पर अशोभनीय टिप्पणी से आहत हूं, अधिकारी को तो सजा मिलनी ही चाहिए, लेकिन मुख्यमंत्री को भी सदन में खेद व्यक्त करना चाहिए, आखिर वह प्रदेश के मुख्य मंत्री हैं। इससे अच्छा संदेश जाएगा।
पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा-
मैं प्रदेश सरकार से मांग करता हूँ कि जिसने भी यह प्रश्नपत्र बनाया है, उसके यह विचार हैं, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए, साथ ही साथ यह अंश किसी पुस्तक से लिए गए हैं तो सरकार उस पुस्तक पर भी प्रतिबंध लगाए और लेखक के खिलाफ कार्रवाई करे।
एमपीपीएससी के चेयरमैन प्रो. भास्कर चौबे ने सोमवार दोपहर प्रेस वार्ता आयोजित कर कहा कि आयोग की अपनी सीमाएं हैं, नियमों के तहत जो भी कार्रवाई होगी वो की जाएगी। यह एक विशेष मामला है इसे एमपी पीएससी ने मान लिया है। आयोग चेयरमैन ने बताया कि एक आदमी पेपर सेट करता है फिर मॉडरेटर उसे चेक करता है, फिर वह प्रेस में छपने जाता है। मामले में पेपर सेट करने वाले और मॉडरेटर दोनों को नोटिस जारी किया गया है। पश्नपत्र में आए गलत सवालों के संबंध में चौबे ने कहा कि आयोग की समिति द्वारा जांच की जाएगी।
प्रदेश में 47 विधायक आदिवासी, 11 भाजपा के
दांगोरे ने कहा प्रदेश की विधानसभा की 230 सीटों में 47 विधानसभा क्षेत्र आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित है। विस में 47 विधायक आदिवासी है जिसमें से 11 आदिवासी विधायक भाजपा के हैं। अकेले खंडवा जिले में भील समाज की आबादी 1.5 से 2 लाख के करीब है। पंधाना विधानसभा क्षेत्र में 76 हजार भील समाज के मतदाता है।
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